➤ हिमाचल हाईकोर्ट ने विजिलेंस ब्यूरो को RTI से बाहर करने की अधिसूचना पर लगाई अंतरिम रोक
➤ राज्य सरकार और विजिलेंस ब्यूरो को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
➤ भ्रष्टाचार जांच से जुड़ी सूचना रोकने के फैसले को कोर्ट में चुनौती
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के दायरे से बाहर करने की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने इस संबंध में 12 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी की थी।
मामले की सुनवाई न्यायाधीश Vivek Singh Thakur और न्यायाधीश Ranjan Sharma की खंडपीठ ने की। अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, विजिलेंस ब्यूरो और संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को निर्धारित की गई है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब वर्ष 2024 में विजिलेंस ब्यूरो में भ्रष्टाचार और कथित रूप से झूठे दस्तावेज पेश करने को लेकर एक एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को 15 लोगों के नाम दिए थे, लेकिन विजिलेंस ने केवल तीन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेशों के बाद याचिकाकर्ता ने जांच की स्थिति जानने के लिए RTI आवेदन दायर किया। इसके जवाब में विजिलेंस ब्यूरो ने 2 मई 2026 को बताया कि राज्य सरकार ने 12 मार्च 2026 की अधिसूचना के तहत विजिलेंस ब्यूरो को RTI के दायरे से बाहर कर दिया है।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कहा गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24(4) के तहत भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में जानकारी मांगी जा सकती है। ऐसे मामलों में सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि राज्य सरकार का फैसला RTI कानून की मूल भावना और पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ है। वहीं राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई संवेदनशील जानकारियां सामने आती हैं। जांच की गोपनीयता बनाए रखने और जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए विजिलेंस ब्यूरो को RTI से बाहर करने का निर्णय लिया गया था।
अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद राज्य सरकार के इस फैसले पर अस्थायी रोक लग गई है और मामले पर अगली सुनवाई 24 जून को होगी।



